शोकसभा का शोकगीतः - दिनेश कुमार कुमावत

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 यहाँ म्रत्यु की तरह शोक की भी श्रेणी है | गरीब की म्रत्यु पर बैठक होती है अमीर की म्रत्यु पर सभा होती है | ये सभा भारत की लोकसभा की तरह नही होती.जहा सारे सदस्य बोलते है ओउर एक बेचारा स्पीकर सुनता है , शोक सभा ने केवल स्पीकर बोलता है ,बाकी सदस्यों को सुनना पड़ता है | लोकसभा में स्पीकर मजबूर है ,शोकसभा में श्रौता | दोनों बेचारो के पास सुनने के अलावा कोई चारा नही है | आजकल मेट्रो शहरो में चलन चला है | मेट्रो आदमी मरता है तो उसकी मेट्रो शोक सभा होती है |सभा में भव्य -दिव्य व्यव्स्ताओ ओउर प्रचार प्रसार | वो दिन दूर नही जब शोकसभाओ का विज्ञापन कैटरीना ओउर करीना करेंगी | कौन कम्भखत होगा जिसका इनके आव्हान पर मरने का मन नही करेगा | वैसे भी पूरा देश इन्ही पर मर रहा है | शोकसभा की भाषणबाजी कई बार लोकसभा की भाषणबाजी से अधिक मारक,संवेदनशील ओउर हास्य प्रधान होती है| शोकसभा के भाषण में मरने वाले की ज्ञात अज्ञात विशेश्तायो के साथ,आत्मा ,जीवात्मा व् परमात्मा को भी लगे हाथ याद किया जाता है | जिसे सुनकर वहा उपस्थित जीवात्मा की आत्मा या तो परमात्मा से मिलने के लिए व्याकुल होती है या घर जाने के लिए | शोकसभा का द्रश्य लोकसभा की ही तरह बड़ा मनोहारी होता है | मरने वाले की डिजिटल या थ्री डी फोटो ,गुलाब के गजरे की गंध , अगरबत्ती की धुँआ ओउर घंग्नाते मोबईलो की रिंगटोन ,तत्काल उठने को तत्पर ,बैठे हुए वी आई पी ,झक सफेद शामियाने | शोकाकुल परिवार के सफेद कुरते पायजामे ,मुख पर माखन की तरह लिपटी उदासी की पर्फोर्मांस इन सबके  समिश्रण से शोकसभा का रियलिटी शो तैयार होता है ,जो रियलिटी शो की ही भाषा में फेंटास्टिक,अमेजिंग ओउर मिन्द्ब्लोइन्ग होता है | आएये मै अपने मरत मित्र वर्मा की शोकसभा में हमारे एक अन्य मित्र शर्मा जी का भाषण बिना काट छांट व् संपादन की हेडेक से मुक्त होकर प्रस्तुत कर रहा हु ,आशा है परमात्मा ओउर शर्मा जी न चाहते हुए भी मुझे माफ़ करेंगे | " भाइयो ओउर प्यारी लेडिजो | वर्मा जी आज हमारे बीच नही है | उनकी शोक सभा में कितने वी आई पी आये हुए है | यहाँ तक की पूर्व मे उनके द्वारा छोड़ी गयी दो धर्म्पत्निया भी अपने धर्म पतियों के साथ आई है | अगर आज इस शोकसभा में खुद वर्मा जी होते तो इनको देखकर कितना खुश होते | वर्मा जी आदमी नही थे ,देवता थे ओउर आप जानते है " यत्र नर्येस्तु पुज्येंते तत्र रमन्ते देवता " | वर्मा जी देवता भी ऐसे थे जिनके बारे में खा गया है " बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया " | आप जानते है , वर्मा जी को भगवान् ने अपने पास क्यों बुलाया , क्योकि वो बहुत ही अच्छे आदमी थे ओउर अच्छे आदमियों की जरूरत भगवान् को भी होती है | मै देख रहा हु  यहाँ भी काफी अच्छे लोग बैठे हुए है | वर्मा जी बहुत ही जाति-धर्म निरपेक्ष व्यक्ति थे | वो संस्कृत की किताब मै हिंदी का लव लेटर लिखकर उर्दू पढने वाली हसिनाओ को दिया करते थे | वर्मा जी सभी धर्मो का सम्मान किया करते थे वो कई बार मुझसे कहते की मै मुसलमान होना चाहता हु ,किन्तु शादी ओउर तलाक के मामले में | उन्होंने विधवाओ के लिए जो काम किये राजाराम मोहन राय ने भी नही किये |राजाराम मोहन राय ने तो केवल विधवा विवाह को प्रोत्साहन दिया , वर्मा जी ने पहले विधवाओ को प्रोत्साहन दिया बाद में उनसे विवाह किया ओउर फिर अपनी विधवाओ को करके हम लोगो को प्रोत्साहित करने के लिए छोड़ गए | वर्मा जी दुसरो की माँ बहनों का सम्मान करते थे | इतना सम्मान करते थे की दुसरो की माँ बहनों को हमेशा दुसरो की माँ बहन समझते थे | ओउर जब बहुत ज्यादा समझ लेते थे ,तो दुसरो की माँ बहने हमेशा ये ही कहती थी " तेरे घर में माँ बहन नही है क्या ?"वे बड़े धार्मिक आदमी थे  ओउर उपवास पर विस्वास करते  थे | वो प्राय मौनव्रत रखते थे ओउर सद्भावना पूर्वक बच्चो को गालिया देकर खोला करते थे | वो मंगल ,गुरु व् शनि का उपवास रखते थे ओउर उपवास के एक दिन पहले   ज्यादा इसलिए खाते थे की कल उपवास करना है ,उपवास के दिन ज्यादा इसलिए खाते थे की आज उपवास किया है, उपवास के दुसरे दिन ज्यादा इसलिए खाते थे की कल उपवास किया है | इस तरह अधिक उपवास करते हुए भी उन्होंने अपने आपको कमजोर नही होने दिया | उन्होंने उन उच्च शिक्षण संस्थाओ से शिक्षा प्राप्त की थी , जिनकी दीवारों पर लिखा होता था ,गुप्त रोगी निराश न हो , हर शुकरवार ,बस एक बार मिले हकीम फलां से ...|हाल ही मे उन्होंने अपना शोध कार्य पूर्ण किया था जिस विषय पर शोध किया उसका नाम था "गायो के " शारीरिक सोंदर्य एव सौष्ठव में बैलो का योगदान "| उन्हें पुराणी कलासिकल फिल्मे देखने का बड़ा शौक था | पिछले दिनों ही हम दोनों ने पुराणी कलासिकल मूवी देखी थी ," मुन्नी की बदनामी ओउर शिला की जवानी " | वे दुःख में से भी सुख निकाल लेते थे | पिछले दिनों जैसा की आप जानते है ,उनकी लड़की भाग गयी थी ,परसों ही वे मुझे बाजार में मिले ,काफी प्रसन्न थे ,मैंने पूछा ," आज आप काफी प्रसन्न है ,क्या आपकी भागी हुए लड़की वापस आ गयी ?" वे बोले ," मेरी तो नही आई ,पर आज शर्मा जी की भी लड़की भाग गयी "| ऐसा था हमारे वर्मा जी का व्यक्तित्व ओउर कतित्व |लगभग ऐसे ही भाषण  होने लगे है शोकसभाओ में | जिनमे न संवेदना है ,न भाव , न भाषा है , ये मर्त्यु का शोक  नही मर्त्यु का तमाशा है |                          
दिनेश कुमार की फेसबुक से साभार
 मरने के बाद सब जानते है कहा जाते है | हमारे देश में मर्त्यु के भिन्न भिन्न प्रकार है | आला अधिकारी या नेता  के मर्त्यु को 'स्वर्गवास ' साधू या महंत की मर्त्यु को 'ब्रह्मलीन ' व् 'गोलोकधाम " कहते है | डोन ,गुंडे ,माफिया की मर्त्यु को 'टपकाना 'व्'लुदाह्कना ' कहा जाता है | ए पी एल  की मर्त्यु को 'निधन ' बी प एल की मर्त्यु  को 'मौत-सटकना ' भी कहा जाता है | अनेक बार मुझे लगता है की अब यमराज भी राशन कार्ड ,क्रेडिट कार्ड व् यूनिक आई डी नंबर देखकर मर्त्यु की श्रेणी डिसाइड करते है  |.........
                                                            
                                                                                                                       
                                                                                                     


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